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दिल चीज़ क्या है, आप मेरी जान लीजिये
बस एक बार मेरा कहा, मान लीजिये
इस अंजुमन में आपको आना है बार बार
दीवार-ओ-दर को गौर से पहचान लीजिये
माना के दोस्तों को नहीं दोस्ती का नाज़
लेकिन ये क्या के गैर का अहसान लीजिये
कहिये तो आसमान को ज़मीन पर उतार लाएं
मुश्किल नहीं है कुछ भी अगर ठान लीजिये
इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं
इन आँखों से वाबस्ता अफ़साने हज़ारों हैं
इन आंखों...
इक तुम ही नहीं तन्हा, उलफ़त में मेरी रुसवा
इस शहर में तुम जैसे दीवाने हज़ारों हैं
इन आँखों...
इक सिर्फ़ हम ही मय को आँखों से पिलाते हैं
कहने को तो दुनिया में मयखाने हज़ारों हैं
इन आँखों...
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ को आंधी से डराते हो
इस शम्म-ए-फ़रोज़ाँ के परवाने हज़ारों हैं
इन आँखों...
जब भी मिलती है मुझे अजनबी लगती क्यूँ है
ज़िंदगी रोज़ नये रंग बदलती क्यूँ है
तुम से बिछड़े हैं तो अब किस से मिलाती है हमें
ज़िंदगी देखिये क्या रंग दिखाती है हमें
जुस्तजू जिसकी थी उस को तो न पाया हमने
इस बहाने से मगर देख ली दुनिया हमने
तुझको रुसवा न किया ख़्हुद भी पशेमाँ न हुये
इश्क़ की रस्म को इस तरह निभाया हमने
कब मिली थी कहाँ बिछड़ी थी हमें याद नहीं
ज़िंदगी तुझको तो बस ख़्ह्वाब में देखा हमने
ऐ ''''''''आद'''''''' और सुनाये भी तो क्या हाल अपना
उम्र का लम्बा सफ़र तय किया तनहा हमने
काहे को ब्याहे बिदेस, अरे लखियन बाबुल मोहे -२
काहे को ब्याहे बिदेस ...
हम तो बाबुल तोरे बेले की कलियन -२
अरे घर-घर माँगे हैं जाए
अरे लखियन बाबुल मोहे ...
काहे को ब्याहे बिदेस ...
महलन तले से डोला जो निकला -२
अरे बीरन में छाए पछाड़ (???)
अरे लखियन बाबुल मोहे
काहे को ब्याहे बिदेस ...
भैया को दियो बाबुल महलन दो महलन -२
अरे हम को दियो पर्देश
अरे लखियन बाबुल मोहे
काहे को ब्याहे बिदेस
अरे लखियन बाबुल मोहे
काहे को ब्याहे बिदेस
अरे लखियन बाबुल मोहे
प्रथम धर ध्यान दिनेश
ब्रह्म विश्णु महेश
- राग : रमकली
अब मोरी नैय्या पार करो जी
हज़रत निज़ाम-उद-दीन औलिया
- राग : गुजरी टोड़ी
सुजन विचार आयो मन मा
कब पिया आये मोरे मन्दिरवा
- राग : शुद्ध सारंग
बिरज में धूम मचायो कान्हा
कैसे कर जाऊँ सखी अपने धाम
- राग : काफ़ी / भीमपलासी
दर्शन दो शंकर महादेव
महादेव तिहारे चरण बिन
मोरे कल नाही पड़त घर पल छिन
- राग : यमन
पकड़त बैंया मोरी बनवारी
चूड़ियाँ क रस गई सारे अनाड़ी
- राग : माल्कौंस
बंसुरी बाज रही धुन मधुर
कन्हैया के रत जागो
- राग : भैरवी
ये क्या जगह है दोस्तों, ये कौन सा दयार है
हद-ए-निगाह तक जहां गुबार ही गुबार है
ये क्या जगह है दोस्तों
ये किस मुकाम पर हयात, मुझको लेके आ गई
न बस खुशी पे कहां, न ग़म पे इख्तियार है
ये...
तमाम उम्र का हिसाब मांगती है ज़िन्दगी
मांगती है ज़िन्दगी
ये मेरा दिल कहे तो क्या, ये खुद से शर्मसार है
ये खुद से शर्मसार है
ये...
बुला रहा क्या कोई चिलमनों के उस तरफ़
चिलमनों के उस तरफ़
मेरे लिये भी क्या कोई उदास बेक़रार है
उदास बेक़रार है
ये...
न जिसकी शकल है कोई, न जिसका नाम है कोई
इक ऐसी शै का क्यों हमें अज़ल से इन्तज़ार है
ये...
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