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निस दिन बरसत नैन हमारे (२)
सदा रहत बावस ऋतु हमपे (२)
जब से श्याम सिधारे (२)
निस दिन बरसत नैन हमारे (२)
अखियां ढूँढ थकी मन थकयों (२)
चलत चलत पग हारे
सूर्दास जी!
अखियां ढूँढ थकी मन थकयों (२)
चलत चलत पग हारे
सूर श्याम भटको मत दर दर खोलो मन के द्वारे (२)
खोलो मन के द्वारे खोलो मन के द्वारे
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